जिंदगी की राह पर चल रही,
है वो घड़ी.
ना साँस है, ना चैन है,
मन भी बेचैन है,
अब तो लगता है कि,
सब खत्म सा हो रहा,
ना आसा है ना मर्ग,
बस अब दिखता है,
तो ये तेरा प्यार ,
भुला नहीं हुं उन,
वादों को, कसमें और,
अपने इरादों को,
पर क्या करूँ,
आज लाचार सा हुं,
जिंदगी में कहीं विचार,
सा हूँ,
-------- रीतिक सिंह साहिब
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