भरोसे की तालीम

ना हो किसी की हार फिर, 

आज हो एक बिस्तार फिर |

भरोसे पे हो अमल फिर, 

और हो वादों का सार फिर ;


अनंत सी हो विश्वाश फिर, 

कभी ना टूटे वो ब्यबहार फिर :

आज हो अमल एक बार फिर, 

ना हो मौत की वार फिर ;


रहे सदा विश्वास फिर, 

गीतों का हो सार अब;

कलम मे हो धार अब, 

दिखे आज धोखेबाज़ फिर|


पैदा हुआ दरार फिर, 

अब कलम की तालीम है ;

गजल की अमीन है, 

अज फिर भरोसे की तालीम है |

------------------रितिक सिंह साहिब 


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