अब जो कहते है, 

तो एक तस्वीर बन आती है, 

कैसै कहें जिसने हमे बर्बाद किया. 

उसी की यादें अब आती, 


भूला चुका हूँ मै खुद को, 

अपने काबिलियत और शकशीयत, 

 जिनसे मुझमे नूर था, 

रव ना करे कि तुम्हारा भी दिल दुख जाए, 

पर बता तो दिया होता कि , 

तुमसे दिल लगाने मे मेरा क्या कुसूर था, 


--------------------रितिक सिंह साहिब 


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