गजल ए परमात्मा
ले आज उठ खड़ा है,
तेरा लाल,
अब करले तू उस ,
परमात्मा को धन्यवाद्,
जो सार्व शक्तिमान है,
उसके मस्तिष्क में विराजमान है,
जो कर्म है वो कर्ता,
जिसकी आसना वो कर्ता,
आज उसी पे वो विराजमान है,
क्यूंकी वो मनुष्य,
नहीं भागवान सार्व शक्तिमान है, (2)
- - - - - रीतिक सिंह साहिब
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