चेतावनी
जंग की है गुहार अब,
ताकत की वार अब;
बहुत बर्दाश्त हुआ जिंदगी की,
ये सार अब ;
कभी ना सोचा था,
जो काम उसपे विश्वास हुआ अब,
इसीलिए जंग की एलान अब;
आँखों की अंधी है,
जो तुमपे धूल सी छाती है
फिर से है जंग की गुहार अब,
ताकत की वार अब |
--------------------रितिक सिंह साहिब
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