सागर की लहरों मे, 

अवाज की पहचान हो;

इन जमानो कि उमंग मे |

ये प्यारा देश भी तरक्कीवान हो ;


सियासत के खेल मे एक मोहरा आज अया है, 

ना जाने एक दूसरों पर टिप्पणी करके, 

इन सरकारों ने क्या पाया है |

ये जलन कि भावना, 


मज़हब की लड़ाई, 

प्यार के ढाकोसले ;

आपसी रंंजिशें |

ना जाने कब फिर अस्तापित होंगी वो अखंड भारत कि बरसातें¦

----—-------------रितिक सिंह साहिब 


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