साल साल जोड के ,अभि तो बालिक हुए हो तुम।
इश्क मोहव्वत तो ठिक है , तुमहे पता है किस हाल में पडे हो तुम,
जुमले शायरियां तो ठिक है,
कया उसके दिल का राज जानते हो तुम।
गजलें पंकतीयां लिखते हो ,ये सब तो ठिक है,
पर क्या उसके जिवन का हाल जानते हो तुम ।।
---------------रितिक सिंह साहिब
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