संसार की एक अजीब दास्तां
अजीब पहेली है इस संसार के रीति की |
खुद ही बिगाड़ ता है,और आशा करता है .
सच्चाई की प्रीत की!
अब तो अंदर से आवाज़ आती है;
जो इस दुनिया की नज़रिए को देखकर बौखला जाती है!
जीवन में सुखी के पल तो कई बार आते हैं।
पर हर श्रेणी में स्थिर रहने वाले मनुष्य ही,
बुद्धिमान कहलाते हैं।।
कई बार जीवन के पड़ाव में ठोकर खाकर हम सब बिखलाते हैं।
पर सच्चे है वही जो खुद को संभाल लेते हैं;
किसी का आना जाना तो जीवन का निरंतर नियम है।।
पर दुनिया की नजरों से अलग होकर:
आशय की मदद करने वाला ही.
ईश्वर द्वारा रचित सच्चा मनुष्य का उदाहरण है।
--------- जय हिंद
------------ ऋतिक सिंह साहिब
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