कवि हु कवि की जुबानी लिखता हूं। 

अरमानों का तो पता नहीं , 

पर फिर भी जिंदगानी लिखता हू , 

अंदाज तो शायरो के नहीं , 

पर फिर भी एक जुबानी कहता हू , 


जिन्दगी की हर मोड़ के , 

एक कहानी लिखता हू , 

क्या पता शायद , 

इसी मे अपनी जिंदगानी लिखता हू , 

  • ----रीतिक सिंह साहिब 

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