समय-समय का खेल है।।
अब जीवन कि एक रेल है,
अब मनुष्यों के लिए नहीं,
अबकरणो के लिए समय का रेल है
समय-समय का खेल है।
न किसी से मोह है , न किसी से स्नेह।
अब तो बस जरूरत मंद से मिलाप ,
और काम से ही राग और अनुराग।
समय-समय का खेल है ।।
----------- रितीक सिंह साहिब
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